लघु कथाएँ

Panchatantra: चालाक खरगोश और बुद्धिहीन शेर (The Cunning Hare and the Witless Lion)

एक बार एक जंगल में एक बहुत ताकतवर शेर रहता था जो की जंगल का राजा था। वह आये दिन दूसरे जानवरों को बेदर्दी से मार कर खाया करता था। उसके डर की वजह से जानवर जंगल में डरे हुए छुप कर रहते थे।

Cunning Hare and the Witless Lion

Illustration: Marina Pereira

एक दिन जब पानी सर के ऊपर से गुज़र गया तो जंगल के जानवरों ने शेर के सामने आत्म-समर्पण की सोची। वे उसके पास जा कर बोले “हे जंगल के राजा, आप रोज़ हममें से कई जानवरों को बेकार में मारते हो, जबकि बस एक जानवर ही आपकी भूख शांत कर सकता है। आइये आज से हम एक समझौता करें। हममें से एक हर रोज़ आपकी भूख शांत करने के लिए आ जाया करेगा। इस तरह से बाकी के जानवर चैन की सांस ले सकेंगे।”

शेर मन ही मन बहुत प्रसन्न हुआ, आखिर उसे रोज़ बिना मेहनत के एक शिकार जो मिलने वाला था। बड़ी मुश्किल से अपनी ख़ुशी दबाके उसने दहाड़ कर कहा। “ठीक है, मगर ध्यान रहे, यदि मुझे एक दिन भी भोजन ना मिला तो मैं सभी जानवरों को मार दूंगा।”

इस तरह समझौते के तहत रोज़ सारे जानवर अपने अपने नाम की चिट डालते, और जो सबसे बदकिस्मत जानवर होता वह उस दिन शेर का निवाला बन जाता। ऐसा क्रम कुछ दिन चलता रहा। कम-से-कम अब सारे जानवर जंगल में आराम से घूम तो सकते थे।

एक बार एक खरगोश के शेर का निवाला बनने की बारी आई। नियम के अनुसार वह बेमन से शेर की मांद की तरफ धीरे धीरे बढ़ चला। रास्ते में उसने एक कुआँ देख। झाँक कर देखने पर उसे उसमें अपना प्रतिबिंब दिखाई पड़ा। इस पर उसे एक तरकीब सूझी।

वह धीरे धीर शेर की मांद तक पहुंचा। खाने में देरी की वजह से शेर गुस्से से तमतमा रहा था। ऊपर से जब उसने एक छोटे से खरगोश को देखा तो वह आग-बबूला हो उठा। उसने कहा “आज मेरे खाने में देरी की वजह से पहले तो मैं तुम्हें खाऊंगा और फिर इतना छोटा जानवर भेजने की वजह से मैं आज बहुत सारे जानवरों को मारने वाला हूँ।”

खरगोश ने बड़े ही धैर्य के साथ जवाब दिया: “मालिक, यह मेरी या किसी भी दूसरे जानवर की गलती नहीं है। हम तो पांच खरगोश आपकी भूख मिटाने आ रहे थे, रास्ते में एक और शेर मिल गया, जो आपसे ज़्यादा बड़ा और ताकतवर था। आपके बारे में बताने पर उसने कहा कि असली जंगल का राजा वही है, और आप झूठे हो। उसने बाकी चार खरगोशों को अपने पास रख लिया और मुझे यह सन्देश देने के लिए भेजा की यदि आप समझते हो की आप उससे ताकतवर हो तो उससे मुकाबला करो, या फिर जंगल छोड़ दो। आप आप जैसा उचित लगे, करो।”

इस पर शेर ने कहा, ऐसा है तो अभी चलो, मैं उस शेर को ठिकाने लगाता हूँ। खरगोश उस शेर को कुएं तक ले आया। जब शेर ने कुएं में झाँक कर देखा तो उसे अपना प्रतिबिम्ब नज़र आया, उसे लगा कि वाकई यह कोई नया शेर है। उसने ज़ोर की दहाड़ मारी, मगर कुएं में से उसे अपनी ही आवाज़ और मज़बूती से सुनाई पड़ी। यह सुन कर शेर मारे गुस्से के उस नए शेर को मज़ा चखाने कुएं में कूद पड़ा और अपनी मृत्यु को प्राप्त हुआ।

समझदार सच ही कहते हैं, “दुष्ट जन दया का पात्र नहीं होते, उन्हें मार देना चाहिए, चाहे धोखे से ही सही”

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